आतंकी शिविर मिटाने में पाक चाहे भारत का साथ
८ नवम्बर २०१०अमेरिका ने भारत से पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते बेहतर करने की बात कही तो भारतीय प्रधानमंत्री ने जवाब दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, ऐसा होना मुमकिन नहीं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ ही बराक ओबामा ने भी कहा कि अमेरिका आतंकवाद के महफूज ठिकानों को बर्दाश्त नहीं करेगा. अब प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के इसी बयान पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने एक नई बात कही है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है, "पाकिस्तान भारत के साथ जुड़ना चाहता है. पाकिस्तान का रुख सकारात्मक है और हम महसूस करते है कि साथ मिलकर आतंकवाद को खत्म किया जा सकता है."
मनमोहन सिंह और बराक ओबामा की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के तुरंत बाद एक टीवी चैनल से बातचीत में शाह महमूद कुरैशी ने यह भी कहा कि आतंक के तार पूरी दुनिया में फैले हुए हैं और इसे किसी एक देश से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए. कुरैशी के मुताबिक, "आतंकवादी और आतंकी शिविर पूरी दुनिया में हैं. ऐसे गुट बन गए हैं जो कई समुदायों, संस्कृतियों और कई देशों को नुकसान पहुंचान चाहते हैं. हम सभी इससे नुकसान उठा रहे हैं इसलिए हम लोग किसी एक खास देश को इसके लिए दोषी नहीं मान सकते."
पाकिस्तानी विदेश मंत्री का यह भी कहना है कि यह आतंकवाद पूरी दुनिया की समस्या है और इससे कोई अकेले नहीं लड़ सकता. कुरैशी कहते हैं कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई पाकिस्तान की सरकार आतंकवाद की निंदा करती है. कुरैशी ने साफ कहा, "पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत या किसी और देश के खिलाफ नहीं होने देगा."
कुरैशी का कहना है कि उनका देश भारत और उन सभी देशों के साथ सहयोग करना चाहता है जो हिंसक कार्रवाइयों में जुड़े संगठनों कि खिलाफ काम करना चाहते हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या ओबामा के दौरे में पाकिस्तान के शामिल नहीं होने से उनका देश अलग थलग पड़ गया है कुरैशी ने कहा, "हम इस दौरे से खुश हैं. अमेरिका इस इलाके में स्थिरता लाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. हम खुद को अलग थलग नहीं महसूस कर रहे और इस दौरे से हमें खुशी हुई है." बाद में कुरैशी ने यह भी जोड़ा कि ओबामा अगले साल पाकिस्तान आएंगे.
रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन
संपादनः ए कुमार